सुबह उठते ही थकान, मुंह में कड़वाहट, पेट का भारी हो जाना, फेस पर सूजन आ जाना और ऐसा फील होना जैसे रात भर बॉडी ने कुछ आराम किया ही नहीं है। अगर आप रोजाना ऐसा फील करते हैं तो एक बात आज समझ लीजिए कि यह बिल्कुल भी नॉर्मल नहीं है। यह एक साइन है कि रात भर आपकी बॉडी ने जो टॉक्सिंस प्रोड्यूस किए हैं, वह अभी भी अंदर ऐसे ही बैठे हुए हैं। इवन मॉडर्न साइंस भी मानती है कि रात को लिवर डिटॉक्स मोड में होता है और गट में वेस्ट बिल्ड अप होने लगता है। और अगर आप सुबह उठके इसको फ्लश आउट नहीं करते हैं तो यह धीरे-धीरे बॉडी में एक्यूमुलेट होता रहता है। और इसका रिजल्ट स्किन डल होने लगती है।
वेट बढ़ने लगता है। इम्युनिटी लो हो जाती है। बीपी और शुगर जैसी प्रॉब्लम्स आने लगती है। और आपको पता ही नहीं चलता है कि आखिर यह सब कुछ कहां से शुरू हो रहा है। लेकिन अगर मैं आपसे कहूं दोस्तों कि सुबह के सिर्फ 10 मिनट में सिर्फ तीन स्टेप्स को फॉलो करके आप इस सारे जहर को बॉडी से बाहर निकाल सकते हैं। जी हां, सिर्फ 10 मिनट में। और इसके लिए आपको ना कोई एक्सपेंसिव सप्लीमेंट चाहिए, ना कोई दवा चाहिए और ना ही कोई और तामझाम चाहिए। बस आपको इन तीन स्टेप्स को एक खास ऑर्डर में करना है। आज मैं आपको यह पूरा प्रोटोकॉल स्टेप बाय स्टेप समझाऊंगा कि इसे आपको कैसे करना है, इसमें क्या खाना है, कब खाना है, कैसे लेना है और साइंस इसके बारे में क्या कहती है। और हां, ब्लॉग को शुरू करने से पहले एक और काम कीजिएगा कि कमेंट करके आप मुझे बताइए कि हमारी ब्लॉग की लेंथ आजकल जो हम बना रहे हैं, वो आपको ठीक-ठाक लग रही है या नहीं लग रही है।, कोई कहता है शॉर्ट होती है। तो थोड़ा सा कंफ्यूजन चल रहा है। इसको क्लियर कीजिए। कमेंट करके बताइए ब्लॉग की लेंथ आप कितनी देखना चाहते हैं? 5 मिनट, 10 मिनट, 8 मिनट या उससे ज्यादा लंबी। तो सबसे पहला स्टेप है सुबह उठकर एक गिलास तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीना।
दोस्तों, तांबे के बर्तन में पानी पीना कोई नया ट्रेंड नहीं है। ऐसा नहीं है कि अभी हाल फिलहाल में ये कुछ नई चीजें याद हो गई है। यह हजारों साल पुरानी एक परंपरा है। आयुर्वेद में इसको ताम्र जल कहा जाता है। रस शास्त्र में जो कि मेटल्स और मिनरल्स की आयुर्वेदिक ब्रांच है। उसमें कॉपर को हीलिंग मेटल माना गया है। यानी हमारी बॉडी को हील करता है। चरक संहिता में लिखा गया है कि तांबे का पानी तीनों दोषों यानी वात, पित्त और कफ को बैलेंस करता है और हमारी बॉडी को हेल्दी रखता है। और जब यह खाली पेट लिया जाता है तो अग्नि यानी आपकी डाइजेस्टिव फायर को जगाता है जिससे कि रात भर का वेस्ट सिस्टम से बाहर निकलता है। मॉडर्न साइंस में भी माना जाता है कि कॉपर में एक पावरफुल प्रॉपर्टी होती है जिसको साइंटिस्ट कहते हैं ओलिगोडायनेमिक इफेक्ट। इसका मतलब यह होता है कि कॉपर के आयंस पानी में रिलीज होते रहते हैं और बैक्टीरिया और वायरसेस को खत्म कर देते हैं। इसके अलावा कॉपर आपकी बॉडी में और भी कई सारे इंपॉर्टेंट काम करता है। जैसे कि थायराइड फंक्शन के लिए कॉपर बहुत जरूरी है। इससे आयरन अब्सॉर्प्शन भी इंप्रूव होता है। मतलब एनीमिया से आपको बचाव मिलता है। खून की कमी दूर होती है। और एसओ डी एंजाइम जो कि बॉडी का सबसे पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट है उसके लिए भी कॉपर एसेंशियल है।
अगर आप दोस्तों कॉपर इन्फ्यूज्ड पानी को लेना स्टार्ट करने जा रहे हैं तो इसके लिए सबसे पहले आप एक प्योर कॉपर का लोटा या फिर बोतल ले लीजिए और ध्यान रखिएगा कि यह ब्रास कोटेड या फिर अंदर से टिन लाइन वाला बर्तन नहीं होना चाहिए सस्ते वाले नहीं होने चाहिए यह प्योर कॉपर का बना हुआ बर्तन होना चाहिए बिल्कुल प्योर अब रात को सोने से पहले इसमें आप पानी को भर कर रख लीजिए और सुबह उठते ही बिना कुछ खाए पिए एक से दो गिलास यह पानी पी लीजिए और ध्यान रखिएगा कि पानी पीने के बाद 5 से 10 मिनट कुछ आपको खाना पीना नहीं है और बॉडी को इसको को अब्सॉर्ब करने का टाइम देना है। दोस्तों अगर आप में से किसी को विल्संस डिजीज है, विल्संस डिजीज यानी एक ऐसा रेयर जेनेटिक डिजीज जिसमें कि बॉडी में कॉपर अनयूजुअली हाई अमाउंट में जमा होने लगता है और लिवर किडनीज़ को खराब कर देता है, डैमेज कर देता है, तो कॉपर वाटर आप बिल्कुल ही अवॉइड कीजिएगा। और अगर यह डिजीज नहीं भी है, तो भी मैं सजेस्ट करूंगा कि दिन भर में ज्यादा से ज्यादा दो ग्लास कॉपर वाटर ही आप पिए। इससे ज्यादा ना पिए। और तो अब तक दोस्तों आपने अपनी गट को कॉपर वाटर पीकर क्लीन कर लिया है। लेकिन अगर इसके बाद खून की गंदगी ऐसे ही आपके अंदर बैठी रहे तो गट की सफाई का कोई भी फायदा नहीं है और इसलिए दूसरा स्टेप आपके लिए और भी ज्यादा जरूरी है और इसके लिए आपको चाहिए एक ऐसी चीज जो कि आपके घर के बाहर या शायद आपके आंगन में ही पहले से मौजूद है और बड़ी आसानी से आप इसको ले सकते हैं।
दोस्तों नीम को आयुर्वेद में सर्व रोग निवारणी कहा गया है। नीम का प्राइमरी काम होता है रक्त शोधन यानी ब्लड को प्यूरिफाई करना। यह सीधा आपके रक्त धातु के ऊपर काम करता है और जब खून साफ होता है, आपकी रक्त धातु साफ होती है तो एक्ने, बॉयल्स, एलर्जी, इंफेक्शंस ये सब चीजें ऑटोमेटिकली कम होने लगती हैं। यही नहीं नीम आपके लिवर को भी प्रोटेक्ट करता है और इम्यूनिटी को भी इंप्रूव करता है। इसे लेने का जो बेस्ट तरीका है वो यह कि आप कॉपर वाटर पीने के 10 मिनट के बाद फौरन बाद नहीं 10 मिनट के बाद 4 से पांच फ्रेश नीम के पत्ते ले लीजिए और इन्हें धीरे-धीरे चबा चबाकर आप खा लीजिए। यह आपको कड़वा तो लगेगा शायद। बहुत भी कड़वा लग सकता है। लेकिन आयुर्वेद कहता है कि जो चीज कड़वी है वही शरीर के लिए असल में मीठी है। वैसे प्रेग्नेंट और ब्रेस्ट फीडिंग लेडीज को नीम बिल्कुल ही अवॉइड करना चाहिए। इसको नहीं लेना चाहिए। और छोटे बच्चों यानी जिनकी उम्र 10 साल से कम है उनको भी नीम कभी भी नहीं देना चाहिए। इसके अलावा अगर आप फर्टिलिटी ट्रीटमेंट ले रहे हैं यानी बच्चे पैदा नहीं होते हैं उसका कोई ट्रीटमेंट चल रहा है तो पहले डॉक्टर से बात करिएगा क्योंकि नीम जो होता है इसके अंदर माइल्ड एंटी फर्टिलिटी इफेक्ट होता है। यानी बच्चे होने की जो हमारे अंदर तादाद होती है जो क्षमता होती है उसको थोड़ा बहुत ये कम करता है। बहुत ज्यादा नहीं डर मत जाइएगा। लेकिन अगर ऐसा कोई ट्रीटमेंट चल रहा है तो थोड़ा सा इसका आपको बस ध्यान रखना है। तो दोस्तों अब आपकी गठ भी क्लीन हो चुकी है। आपका खून भी साफ हो रहा है। लेकिन अगर यह साफ खून ऑक्सीजन से चार्ज ना हो तो फायदा आधा अधूरा ही रह जाएगा। इसलिए तीसरा स्टेप सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है और यह आप बैठे-बैठे घर में अपने आराम से मैं कहता हूं अभी शायद मेरे साथ ही कर सकते हैं। दोस्तों प्राण का मतलब होता है लाइफ फोर्स और प्राणायाम का मतलब होता है लाइफ फोर्स को कंट्रोल करना, एक्सपेंड करना। आपको बस दो प्राणायाम करने हैं।
ज्यादा कुछ लंबा चौड़ा आपको काम नहीं करना है। पहला आपको कपालभाति करना है और दूसरा अनुलोमविलोम करना है। कपालभाति में जब आप फोर्सफुली सांस को बाहर निकालते हैं तो CO2 यानी कार्बन डाइऑक्साइड एक्सपल्शन आपका बढ़ता है और पैरासिंैथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिवेट होता है। यानी बॉडी का जो रेस्ट एंड रिपेयर मोड है वो ऑन हो जाता है। अनुलोम विलोम के बारे में रिसर्च बताती है कि यह हार्ट रेट वेरिएबिलिटी यानी एचआरवी को इंप्रूव करता है। बेटर एचआरवी मतलब आपका दिल ज्यादा एफिशिएंटली काम कर रहा है। तो बस जमीन पर सुखासन में आराम से आप बैठ जाइए। या फिर अगर जमीन पर नहीं बैठ सकते हैं कोई दिक्कत है तो चेयर पे भी आप बैठ सकते हैं और अपनी बैक बोन को एकदम सीधा रखिएगा। अब कपालभाति सबसे पहले आपको 5 मिनट के लिए करना है। इसके लिए आपको 30 बार फोर्सफुली सांस को नाक से बाहर निकालना है। यह आपका एक राउंड होगा। कुछ-कुछ इस तरह से। जब भी आप सांस अपनी नाक से बाहर निकालेंगे तो आपको अपने डायफ्राम को कॉन्ट्रैक्ट करना है। पेट को अंदर की तरफ खींचना है फोर से और फोर से ही आपको अपना सांस बाहर निकालना है। अब 30 बार इस तरह से करने के बाद आप 1 मिनट का रेस्ट लीजिए और ऐसे आप तीन राउंड कीजिए टोटल। इसके बाद आपको अनुलोम-विलोम करना है 3 मिनट के लिए। इसके लिए आप अपने राइट हैंड के जो थंब है इससे राइट नस्ट्रिल को बंद कीजिए और लेफ्ट नस्ट्रिल से गहरी सांस अंदर लीजिए। इसके बाद 8 सेकंड के लिए सांस को होल्ड कीजिए, रोक कर रखिए और फिर अपनी इंडेक्स फिंगर से दूसरी नस्ट्रिल जिससे आपने सांस लिया था उसको बंद कीजिए और राइट नस्ट्रिल से एक्सहेल कीजिए। यह आपका एक सर्कल होगा और ऐसे पांच सर्कल टोटल आपको करने हैं। और एंड में आपको 1 मिनट आंखें बंद करके नॉर्मल सांस लेनी है और अपनी बॉडी को सेटल होने का टाइम देना है। दोस्तों, हार्ट पेशेंट्स और हाई बीपी वाले लोगों को कपालभाति धीरे-धीरे करना चाहिए।
स्पीड कम रखनी चाहिए। प्रेग्नेंट वुमेन को कपालभाति बिल्कुल अवॉइड करना चाहिए। नहीं करना चाहिए। हर्निया या फिर रीसेंट एब्डोमिनल सर्जरी अगर आपकी हुई है तो इसको अवॉइड कीजिए। और अगर किसी भी टाइम आपको चक्कर ये करते हुए आए या घबराहट आए ऐसा लगे कुछ घबराहट सी हो रही है, बेचैनी सी हो रही है तो इसको करना तुरंत आप बंद कर दीजिए। तो याद रखिए सुबह-सुबह उठकर पहले तांबे का पानी आपकी गठ को क्लीन करेगा। फिर नीम आपके खून को साफ करेगा और फिर प्राणायाम आपकी सेल्स को ऑक्सीजन से चार्ज करेगा। बस 10 मिनट हर रोज कोई भी आपको दवा नहीं लेनी है। कोई भी सप्लीमेंट नहीं लेना है। कोई खर्चा नहीं करना है। और आपकी बॉडी जो है 21 दिन में एक ऐसा बदलाव महसूस करेगी कि जो आप देखकर खुद भी हैरान हो जाएंगे। तो यह ब्लॉग अभी सेव कर लीजिए ताकि कल से आप इसको शुरू कर सकें और अगर कोई कंफ्यूजन हो तो ब्लॉग से रेफरेंस ले सकें। अगर आपके घर में कोई बड़े बुजुर्ग हैं, पेरेंट्स हैं तो उनके साथ यह ब्लॉग जरूर शेयर कीजिएगा क्योंकि उनकी हेल्थ के लिए यह सबसे बड़ा गिफ्ट होगा। सब्सक्राइब करना मत भूलिएगा। अगर पहली बार ब्लॉग देखी है क्योंकि ऐसी ही हेल्थ की बातें और बढ़िया-बढ़िया टिप्स मैं आपके लिए लेकर आता रहता हूं। मिलते हैं एक नई ब्लॉग में। तब तक अपना ध्यान रखिए, हंसते रहिए, मुस्कुराते रहिए। रोज कुछ ना कुछ नया सीखते रहिए ताकि आप रह सकें हेल्दी हमेशा।