Jaldi Budhe aur mote kyu ho rhe? ye hai 5 bari galtiya.

दोस्तों जरा एक बात ऑनेस्टली सोच कर आप मुझे बताइए। अगर मैं आपसे कहूं कि आप बिना एक्सट्रीम डाइटिंग के बिना खुद को थकाए हुए अपनी बॉडी का एक्स्ट्रा फैट कम कर सकते हैं। मसल्स वापस बना सकते हैं और अपनी एनर्जी और स्टैमिना को भी फिर से काफी हद तक वापस पा सकते हैं। तो क्या आप बिलीव करेंगे? मैंने पिछले 5 साल के अपने एक्सपीरियंस में हजारों लोगों को यह कहते हुए सुना है कि यार मैं ट्राई तो कर रहा हूं लेकिन मेरी बॉडी रेस्पोंड नहीं कर रही है। कुछ लोग कहते हैं कि यार मैंने सब कुछ करके देख लिया वजन तो यार कम ही नहीं हो रहा है। और जब मैं ऐसे लोगों की डेली रूटीन को, उनके खाने को, उनके सोने को और उनकी एक्टिविटीज को ध्यान से देखता हूं तो मुझे हर बार पांच सेम मिस्टेक्स दिखाई देती हैं। जो कि लोगों को उनकी रियल एज से काफी पहले ही थका हुआ मोटा और लो एनर्जी वाला बना देती हैं।

आज की इस ब्लॉग में मैं आपके साथ वही पांच मिस्टेक्स डिटेल में डिस्कस करूंगा। आपको समझाऊंगा जो कि ज्यादातर लोगों में वजन बढ़ाने का कारण बनती हैं। जिनसे आप उम्र से पहले ही बूढ़े दिखने लगते हैं। और साथ ही आपको मैं यह भी बताऊंगा, यह भी समझाऊंगा कि इनको प्रैक्टिकली कैसे अवॉइड किया जा सकता है। तो चलिए बिना किसी देरी के आज सीधे शुरू करते हैं मिस्टेक नंबर वन से जो कि है ईटिंग लाइक योर 20ज। जी हां, पहली और सबसे कॉमन मिस्टेक है 30, 40, 50 साल की ऐज में भी ऐसे खाना खाना जैसे कि आप 20 साल के हैं। यह बहुत ही कॉमन और सबसे बड़ी गलती है जो कि हम में से 99% लोग आज भी कर रहे हैं।

तो आखिर इस प्रॉब्लम का सॉल्यूशन क्या है? जी नहीं। सॉल्यूशन स्ट्रिक्ट डाइटिंग, बिल्कुल भूखा रहना यह सब सॉलशन नहीं है बल्कि सॉल्यूशन है एडजस्टमेंट। जी हां, आपने खाने को एडजस्ट करना है। आपको बंद नहीं करना है। अपनी डाइट में पोर्शन साइज थोड़ा सा छोटा कर दीजिए। प्रोसेस्ड और जंक फूड्स को कम कर दीजिए और प्रोटीन को अपनी डाइट में सबसे ज्यादा तवज्जो दीजिए। इसलिए मेरी सलाह है कि आप आज से ही ओवर ईटिंग करना तो बिल्कुल छोड़ ही दीजिए। हमेशा एक रोटी की भूख छोड़कर ही खाना खाइए। और सबसे इंपॉर्टेंट लिक्विड कैलोरीज को बिल्कुल बंद कर दीजिए और प्रोटीन के ऊपर ध्यान दीजिए। लिक्विड कैलोरीज को क्यों बंद करना है? क्योंकि लिक्विड कैलोरीज जैसे कि मीठी चाय, कॉफी, सॉफ्ट ड्रिंक्स, बियर या फ्रूट जूसेस जो होते हैं, यह बॉडी में बहुत ही तेजी से अब्सॉर्ब होते हैं और इसका नुकसान जो है सबसे ज्यादा होता है।

दूसरी गलती है अपनी नींद को टेकन फॉर ग्रांटेड लेना। दोस्तों, टीनएज और अपने अर्ली 20ज में हम रात-रात भर जगा करते थे। कभी एग्जाम के लिए, कभी मस्ती के लिए, कभी पार्टीज के लिए। रात को चार-प घंटे भी अगर हम सो लिए, तो हमारा किसी तरह से काम उससे चल जाता था। लेकिन आज अगर नींद ठीक से पूरी नहीं होती है तो सारा दिन बेकार हो जाता है। काम पर फोकस नहीं हो पाता है दिन में और बॉडी में जो एनर्जी है वो भी खत्म सी हो जाती है। आई एम श्योर आप में से कई लोग ऐसे होंगे जो शिफ्ट में ड्यूटीज करते होंगे या अगर आप में से कोई हमेशा नई ड्यूटी करता है तो आप अग्री करेंगे कि शुरू में तो हमें इससे ज्यादा कुछ फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन कुछ महीनों के बाद हमारी बॉडी में इससे चेंजेस आने शुरू हो जाते हैं। रिकवरी स्लो हो जाती है। मूड इरिटेबिलिटी बढ़ जाती है और एनर्जी भी बॉडी में कम लगने लगती है और तब हमें यह समझ में आता है कि नींद लग्जरी नहीं है भाई। नींद अच्छी सेहत की फाउंडेशन है। रिसर्च बताती है कि अगर आप सिर्फ एक हफ्ते भी ठीक से ना सोएं तो उससे बॉडी में फैट एक्यूमुलेशन दो गुना तेजी से बढ़ने लगता है। इसलिए चाहे आप अच्छी डाइट फॉलो कर रहे हो या एक्सरसाइज कर रहे हो आप नींद को कभी भी टेक एंड फ्रॉग ग्रांटेड मत लीजिएगा। अच्छी नींद के लिए कुछ बेसिक सी चीजों को फॉलो कीजिए। सोते टाइम बेडरूम में एकदम अंधेरा करके सोइए। इससे मेलाटोनिन जल्दी सीक्रेट होता है और आप ज्यादा अच्छे डीप स्लीप साइकिल में चले जाते हैं। इसके अलावा कमरे को थोड़ा ठंडा रखिए और सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन को चाहे वो टीवी हो या मोबाइल हो बिल्कुल बंद कर दीजिए। इसके अलावा एक और सिंपल सी हैबिट जो मैं रिकमेंड करता हूं वो यह कि आप बेड टाइम अलार्म लगाना शुरू कर दीजिए। जी हां, हम अपने उठने का अलार्म तो लगाते हैं, लेकिन सोने का अलार्म कोई नहीं लगाता है। तो बस अभी से अपने फोन के अंदर एक रिमाइंडर लगाइए, अलार्म लगाइए और जैसे ही अलार्म बजे, लाइट्स बंद करके सोने की तैयारी करना शुरू कर दीजिए। जब आप कुछ दिन इस तरह से कंसिस्टेंसी से अपने रूटीन फॉलो करेंगे, तो धीरे-धीरे फिर आपको इस अलार्म की जरूरत नहीं पड़ेगी। बॉडी खुद ब खुद इस टाइम पर सोने के लिए तैयार होने लगेगी। आपको नींद आनी शुरू हो जाएगी। 

तीसरी मिस्टेक है स्ट्रेंथ से ट्रेनिंग नहीं करना। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग आर यू किडिंग? अरे यार इस बुढ़ापे की उम्र में कोई जिम जाने की उम्र है। वो तो बच्चे जवान लोग जाते हैं, बॉडी बनाते हैं, मॉडलिंग करते हैं। दोस्तों, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। आई नो आप में से ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि हमारे लिए जिम जाना ठीक नहीं है। हमारे लिए वॉकिंग ही काफी है। आप सोचते हैं कि इस उम्र में आप सिर्फ वॉक करेंगे, सिर्फ कार्डियो करेंगे, तो उससे आपका काम चल जाएगा। लेकिन सच यह है कि अगर आप स्ट्रेंथ ट्रेनिंग नहीं कर रहे हैं तो बॉडी धीरे-धीरे मसल को लूज करने शुरू कर देती है और आपको इसका पता भी नहीं चलता। दोस्तों, मसल सिर्फ आपके लुक्स के लिए नहीं होती है। सिर्फ मॉडलिंग के लिए, बॉडी बनाने के लिए, टाइट टीशर्ट्स पहनने के लिए नहीं होती है। बल्कि यह हमारी बॉडी के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। यह जॉइंट्स को सपोर्ट करती है। मेटाबॉलिज्म को एक्टिवेट करती है और आपके इवन टेस्टोस्टरॉन प्रोडक्शन को भी सपोर्ट करती है। स्टडीज दिखाती हैं कि 40 साल की उम्र के बाद अगर आप स्ट्रेंथ ट्रेनिंग नहीं करते तो हर साल लगभग 1% मसल आपकी कम होती रहती है। इसलिए या तो जिम जाना शुरू कर दीजिए या फिर अगर आप जिम नहीं जा सकते हैं, पॉसिबिलिटी नहीं है, दूर है या कोई और प्रॉब्लम है तो हफ्ते में कम से कम तीन-चार दिन आप बेसिक बॉडी वेट स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जरूर कीजिए। जैसे कि स्क्वाट्स, पुश अप्स, पुल अप्स या फिर रेजिस्टेंस बैंड्स लेकर उनसे आप स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना शुरू कर दीजिए। और अगर आपके लिए इतना भी पॉसिबल नहीं है बुढ़ापे की वजह से या किसी और वजह से या कोई और मजबूरी है आपकी तो आप घर में जो भी कुछ वेट्स आपके मौजूद हैं चाहे बिफलेरी की बोतल ही क्यों ना आए उसी से आप अपने डंबल्स वगैरह की तरह उसको यूज़ करना शुरू कर दीजिए क्योंकि समथिंग इज ऑलवेज बेटर देन नथिंग। दोस्तों बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो यह सोचते हैं कि यार शायद उनमें ही डिसिप्लिन की कमी है। शायद वो ही नहीं कर पा रहे हैं। शायद वो ही ज्यादा टाइम नहीं निकाल पा रहे हैं या फिर उनको ज्यादा मोटिवेशन नहीं आ रहा है। लेकिन सच यह है दोस्तों कि मोटिवेशन सिर्फ एक टेंपरेरी चीज होती है। फॉर एग्जांपल अगर आप मेरी वीडियो अभी देख रहे हैं तो शायद आपको लग रहा होगा कि बस कल से ही यह सब कुछ शुरू कर दूंगा, वजन घटाऊंगा, फिट हो जाऊंगा। लेकिन मुझे पता है कि जैसे ही यह ब्लॉग आप खत्म करेंगे आप वापस से अपने रूटीन पर आ जाएंगे। खाना पीना सब कुछ शुरू कर देंगे। सब भूल जाएंगे। एंड दिस इज अ हारश रियलिटी। और इससे कोई भी अपना मुंह नहीं मोड़ सकता। यह हम सबके साथ होता है। इवन मेरे साथ भी ऐसा होता है। हम सब सोचते हैं कि अगर यह कर लेंगे तो सब कुछ ठीक हो जाएगा। अगर वो कर लेंगे तो सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन सच्चाई यह है कि ऐसा होता नहीं है। हम थोड़े बहुत दिन तो मोटिवेटेड रहते हैं। काम के लिए हमें दिल करता है कुछ करने का। लेकिन फिर जैसे ही यह मोटिवेशन कम हो जाता है, वैसे ही हम वापस अपने ढर्रे पर वापस आ जाते हैं। क्यों? क्योंकि मोटिवेशन एक लिमिट तक ही काम करता है। यह हमेशा नहीं रहता। लेकिन हां, डिसिप्लिन हमेशा रहता है। मैं आपको एक एग्जांपल देकर समझाता हूं। देखिए आर्मी में बहुत टफ एनवायरमेंट होता है। इसलिए जब कोई आर्मी में भर्ती होता है तो कुछ ही दिन में उसका मोटिवेशन खत्म हो जाता है। उसे लगता है यार मैं कहां फंस गया और यह बात आर्मी वाले अच्छी तरह जानते हैं। इसलिए उन्होंने वहां पर एक पूरा सिस्टम बनाकर रखा हुआ है। जहां फिक्स्ड रूटीनंस होते हैं। क्लियर स्ट्रक्चर होता है चीजों का और पूरा एनवायरमेंट आपको सही काम करने के लिए पुश करता है। ऐसा माहौल बना देते हैं कि आपको वो करना ही पड़ता है।

इसलिए बात मोटिवेशन की नहीं है बल्कि बात है डिसिप्लिन की और सिस्टम्स बनाने की। आपको अपनी लाइफ में ऐसे सिस्टम्स बनाने की जरूरत है जो कि ऑटोमेटिकली आपको सही डायरेक्शन में ले जाने में मदद करें। जैसे कि अगर आप जंक फूड नहीं खाना चाहते हैं तो सबसे सिंपल तरीका यह है कि आप उसे घर में रखें ही ना, उसे खरीदें ही ना। फिर रोज आपको खुद को रोकने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी क्योंकि जाहिर सी बात है वो चीज आपके घर में है ही नहीं। इसी तरह अगर वर्कआउट अक्सर आपका स्किप हो जाता है तो रात को अपने शूज और क्लोथ्स रेडी रख लीजिए। बिल्कुल अपने सामने रख लीजिए ताकि सुबह उठते ही जब आप उन्हें देखें तो आपके अंदर एक मोटिवेशन आए आपको डिसीजन लेने में और वहां जाने में कोई एक फ्रिक्शन ना महसूस हो। क्योंकि दोस्तों जब चीजें ऑटोमेटिक हो जाती हैं, आसान हो जाती हैं आपके लिए फॉलो करना तब विल पावर पर ज्यादा भरोसा करने की जरूरत आपको नहीं पड़ती। और यही लॉन्ग टर्म सक्सेस का सबसे प्रैक्टिकल और सस्टेनेबल तरीका है। यानी सिस्टम्स को बिल्ड कीजिए, रूल्स बनाइए, चीजों को अपने लिए आसान बनाइए। उसके बीच में फ्रिक्शन कम कीजिए और आप अपने रूटीन को फॉलो करने में काफी ज्यादा आसानी महसूस करेंगे।

और पांचवी मिस्टेक है अपने हॉर्मोंस को इग्नोर करना। दोस्तों, यह वाकई में सबसे ज्यादा डेंजरस गलतियों में से एक है। क्योंकि इसमें होता क्या है कि लोग बिना सोचे समझे हर एक चीज को अपनी एज के नाम पर एक्सेप्ट कर लेते हैं। सोचते हैं कि यार इस ऐज में तो ऐसा होता ही है। बहुत से लोग मान लेते हैं कि वजन बढ़ना, हर वक्त थकान रहना या फिर सेक्स ड्राइव का कम हो जाना यह बढ़ती उम्र का एक पार्ट है। लेकिन अपने एक्सपीरियंस की बात करूं तो मेरा एक्सपीरियंस कुछ और ही कहता है। मुझे लगता है कि ज्यादातर केसेस में असली रीजन एज नहीं होती बल्कि हॉर्मोंस में होने वाली गड़बड़ी होती है। फॉर एग्जांपल थायरॉइड हॉर्मोन में होने वाली गड़बड़ी, मर्दों में टेस्टोस्टरॉन का लो हो जाना और लेडीज में हॉर्मोनल इमंबैलेंस का हो जाना। यह बहुत ही कॉमनली देखी जाती हैं चीजें और यही असल कल्पिट हैं जो कि आपके अंदर सारी प्रॉब्लम्स को क्रिएट करती हैं। मैंने कई पेशेंट्स के साथ काम किया है जहां सिर्फ लाइफस्टाइल में थोड़े से सही चेंजेस करने की वजह से हॉर्मोनल इमंबैलेंस को काफी हद तक इंप्रूव किया गया। याद रखिए मर्दों में टेस्टोस्टरॉन सिर्फ एक सेक्स हॉर्मोन नहीं है। लेडीज़ में प्रोजेस्ट्रॉन और एस्ट्रोजन हॉर्मोस जो हैं यह सिर्फ मेस्ट्रोल साइकिल को ही में रेगुलेट नहीं करते हैं। थायरॉइड का काम सिर्फ थायरॉइड मेंटेन करना नहीं है बल्कि ये हॉर्मोंस आपकी मसल स्ट्रेंथ, फैट लॉस की एबिलिटी, नींद की क्वालिटी और आपकी मेंटल ड्राइव सभी चीजों के ऊपर बहुत गहरा असर डालते हैं। जब हॉर्मोंस में कोई इमंबैलेंस होता है ना तो पूरा सिस्टम धीरे-धीरे स्लो होने लगता है। इसलिए अंदाजा लगाने की गलती मत कीजिए। यह गलती बंद कर दीजिए। गेस मत कीजिए। प्रॉब्लम क्या है? इसको जड़ से जानिए। अपने हॉर्मोन लेवल्स को चेक करवाइए। क्योंकि नंबर्स कभी भी झूठ नहीं बोलते हैं। और अगर खुदा ना खास्ता आपके हॉर्मोंस में कोई कमी आती है, कुछ गड़बड़ आपको लगती है, डॉक्टर कुछ बताते हैं, तो फिक्र मत कीजिए क्योंकि ज्यादातर केसेस में इनको नेचुरली इंप्रूव करना पॉसिबल होता है। सही नींद, रेगुलर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, साफ और बैलेंस्ड खाना और स्ट्रेस को कंट्रोल करना। ये चार चीजें मिलकर आपके हॉर्मोंस को फिर से सपोर्ट कर सकती हैं और बॉडी को वापस ट्रैक पर ला सकती हैं। एंड इन सीवियर केसेस आप मेडिकल ट्रीटमेंट का सहारा भी ले सकते हैं। दोस्तों अगर आप अपनी बॉडी को फिर से स्ट्रांग, एनर्जेटिक और रिस्पांसिव बनाना चाहते हैं, तो इन पांच मिस्टेक्स को ध्यान में रखिएगा क्योंकि अगर यह गलतियां आपसे हो रही हैं, तो चाहे आप कुछ भी कर लें, जो भी कर लें, आपको रिजल्ट्स नहीं मिलेंगे या फिर उतने नहीं मिलेंगे जितने मिलने चाहिए। वैसे अगर आपको अपनी किसी भी हेल्थ प्रॉब्लम के लिए कोई पर्सनल गाइडेंस चाहिए तो आप हमारी हेल्थ असेसमेंट सर्विस का यूज कर सकते हैं। लिंक डिस्क्रिप्शन में दिया हुआ है। और हां कमेंट करके मुझे जरूर बताइए कि आपको इनमें से कौन सी बात सबसे ज्यादा रिलेट हुई। कौन सी ज्यादा आपके दिल को लगी। और आप में से कितने लोग 40 साल के बाद भी फिट रहना चाहते हैं। यह भी जरूर लिखिएगा। मैं आपसे नेक्स्ट ब्लॉग में मिलूंगा। तब तक के लिए अपना ध्यान रखिए। हंसते रहिए, मुस्कुराते रहिए। रोज कुछ ना कुछ नया सीखते रहिए ताकि आप रह सकें हेल्दी हमेशा।

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