दोस्तों पेट की चर्बी एक वार्निंग साइन है। अक्सर हमें लगता है कि यह सिर्फ एक कॉस्मेटिक प्रॉब्लम है जो हमारी अपीरेंस को खराब कर रही है। लेकिन सच यह है कि पेट का बढ़ना कई बड़ी-बड़ी बीमारियों को खुला न्योता देने जैसा है। जिसमें से एक बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम होती है फैटी लिवर। जी हां, अगर आपका पेट निकला हुआ है बाहर की तरफ तो 90% चांसेस हैं कि आपका लिवर भी अंदर से फैटी हो चुका है। आज की इस ब्लॉग में मैं आपको बताऊंगा कि पेट की चर्बी और लिवर की चर्बी का क्या कनेक्शन है। क्यों पेट की चर्बी को कम करना इतना ज्यादा मुश्किल होता है और ब्लॉग के एंड में मैं आपको सिर्फ दो सिंपल किचन इंग्रेडिएंट्स भी बताऊंगा जो कि लिवर फैट को घटाने में और पेट की चर्बी को कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं। तो इस ब्लॉग को पूरा पढिये और ध्यान से पढिये क्योंकि अगर आपने इस प्रोसेस को सही से समझ लिया तो बेली फैट भी आपका कम होगा और लिवर भी साफ हो जाएगा। अक्सर लोग सोचते हैं कि ज्यादा तेल घी खाने से लिवर में फैट जमा हो जाता है। लेकिन सच यह है कि लिवर में फैट ज्यादातर कार्बोहाइड्रेट्स से बनता है। खासतौर से रिफाइंड कार्ब्स से।
सोचिए आपका रूटीन क्या है? सुबह चाय और बिस्किट, दोपहर में रोटी या चावल, शाम को फिर से चाय या कुछ नमकीन वगैरह और रात को फिर से रोटी या राइस। यानी दिन में चारप बार इंसुलिन स्पाइक होना तो तय है। और जब इंसुलिन बार-बार स्पाइक करता है तो बॉडी फैट को ठीक से बर्न नहीं कर पाती। और जो एक्स्ट्रा ग्लूकोस ज्यादा रिफाइंड कार्ब्स से हमारे खाने से बनता है। लीवर उसे फैट में कन्वर्ट करके स्टोर करने लगता है। इससे धीरे-धीरे लीवर के सेल्स के अंदर फैट जमा होने लगता है और इसी को हम कहते हैं फैटी लिवर।
दोस्तों फैटी लिवर एक साइलेंट कंडीशन होती है जिसमें ना कोई दर्द होता है और ना ही कोई प्रॉब्लम होती है और इसीलिए अक्सर फैटी लिवर का पता तब चलता है जब या तो वो प्रॉब्लम बहुत ज्यादा बढ़ चुकी हो और या फिर आप किसी और प्रॉब्लम के लिए अपना अल्ट्रासाउंड कराने गए हो और उसमें डॉक्टर ने बोला हो कि आपको फैटी लिवर है। लेकिन अगर आप सिर्फ तीन साइंस को पहचान लें, सिर्फ तीन लक्षणों को पहचान लें तो आप जान सकते हैं कि आपके अंदर फैटी लिवर है या नहीं है। पहला अगर आपका पेट टाइट और हार्ड फील होता है, पेट दबाने से मुलायम चर्बी नहीं बल्कि अंदर एक टाइटनेस एक पत्थर जैसी फीलिंग महसूस होती है, तो इसका मतलब है कि आपके अंदर विसरल फैट बढ़ा हुआ है जो कि बहुत ही ज्यादा नुकसानदेह है। दूसरा अगर आपकी ब्लड रिपोर्ट्स में आपका ट्राइग्लिसराइड्स बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है तो यह भी फैटी लिवर का एक स्ट्रांग इंडिकेटर है। यानी अगर ट्राइग्लिसराइड्स 150 के ऊपर है तो आपको अलर्ट होने की जरूरत है। और तीसरा अगर खाने खाने के बाद आपको अनयूजुअल थकान फील होती है। ऐसा लगता है जैसे एनर्जी आना बिल्कुल बंद हो गया है और बहुत ज्यादा नींद सी आ रही है तो यह इंसुलिन स्पाइक और लिवर ओवरलोड का साइन हो सकता है। याद रखिए अगर इन तीन में से दो साइन भी आपके अंदर है तो आपको आज ही एक्शन लेना होगा। सबसे पहले इंसुलिन को रिसेट कीजिए। बार-बार स्नैकिंग करने से और हाई कार्ब्स फूड लेने से परहेज कीजिए। और इसकी जगह 24 घंटे में सिर्फ तीन प्रॉपर मील्स लीजिए। इससे आपकी इंसुलिन बैलेंस में आएगी।
और जब इंसुलिन आपके नीचे आएगी तो बॉडी स्टर्ड फैट को अपने आप जलाना शुरू कर देगी।
दूसरा अपनी डाइट से रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स को बिल्कुल बंद कर दीजिए। वाइट राइस, मैदा, ब्रेड, बिस्किट्स, बेकरी आइटम्स, चीनी, मिठाई, ज्यादा मीठा, फ्रूट, ज्यादा फ्रूट जूसेस, कोला या सोडा इस तरह की चीजें कम से कम चार हफ्ते के लिए बिल्कुल बंद कर दीजिए। कम नहीं बिल्कुल बंद कर दीजिए और मेन मील्स में भी रोटी और चावल कम करके अपने खाने में सब्जी, फाइबर और प्रोटीन को ज्यादा लीजिए।
तीसरा स्टेप है अपने डिनर को जल्दी करना। यह बात दोस्तों मैं शायद सैकड़ों बार अपनी ब्लॉग में लिख चुका हूं कि रात का खाना आपको 7 8:00 बजे तक खत्म कर लेना चाहिए। इसकी आदत डाल लेनी चाहिए। जब आप लेट नाइट खाना खाते हैं तो लिवर को रिपेयर करने का मौका नहीं मिलता। लिवर का डिटॉक्स और फैट बर्निंग का जो काम है वह रात में होता है। लेकिन जब आप खाली पेट होते हैं सिर्फ तब यानी अगर आप रात को लेट खाना खाएंगे ज्यादा खाना खाएंगे तो आपका लीवर जो है वो डाइजेशन प्रोसेस में ही लगा रहेगा। अपनी साफ सफाई का काम वो प्रॉपर्ली नहीं कर पाएगा।
और चौथा स्टेप है रोजाना 30 मिनट ब्रिस्क वॉक करना। दोस्तों मूवमेंट इज मेडिसिन। अगर आप जिम जा सकते हैं तो आपके लिए बहुत ही बढ़िया है। लेकिन अगर नहीं भी जा सकते हैं तो कम से कम आधा घंटा ब्रिस्क वॉक तो जरूर कीजिए। वॉक से इंसुलिन सेंसिटिविटी इंप्रूव होती है। ट्राइग्लिसराइड्स कम होते हैं और लीवर पर प्रेशर जो है वो भी कम पड़ता है। इन चार पॉइंट्स के साथ-साथ अगर आपको और ज्यादा सपोर्ट चाहिए दोस्तों, तो आप चाहें तो कॉलिड नाम से यह एक आयुर्वेदिक सिरप भी आता है। आप इसको भी यूज़ कर सकते हैं। कॉलिड को मैं फैटी लवर के लिए कई बार पहले भी ब्लॉग में रिकमेंड कर चुका हूं। और जिसने भी इसको अभी तक यूज़ किया है उन लोगों को मोस्टली पॉजिटिव रिजल्ट्स ही मिले हैं। इससे भृंगराज, कुंदनवा, कालमेग और गुडूजी जैसे हाई क्वालिटी हर्ब्स से बनाया जाता है और इससे लिवर डिटॉक्स होने में, लिवर की सूजन को कम करने में, पेट हल्का करने में और फैटी लिवर के जो फैट है उसको पिघलाने में आपको बहुत ही ज्यादा हेल्प मिलती है। इसके सिर्फ दो-दो चम्मच यानी करीब 10 ml आपको दिन में दो टाइम खाना खाने के बाद लेने हैं। गुनगुने पानी से लेंगे तो और ज्यादा अच्छा है। अदरवाइज नॉर्मल पानी से भी इसको आप ले सकते हैं। और इसके साथ में तली भुनी चीजों का परहेज रखिए। खाना हल्का लीजिए और जो पॉइंट्स मैंने आपको चार बताए हैं उनको फॉलो कीजिए। एंड आई एम 100% श्योर कि इससे आपको बहुत ही अच्छे रिजल्ट्स मिलेंगे। आपके लीवर को एक बहुत ही बढ़िया सपोर्ट मिलेगी और यू विल थैंक मी लेटर। दोस्तों, आप नोटिस करेंगे कि सिर्फ इन चार चेंजेस से ही 10 से 14 दिन के अंदर ही आपके पेट की जो टाइटनेस है, वह कम होने लगेगी। बेली फैट कम होने लगेगा, ब्लोटिंग कम हो जाएगी और एनर्जी भी आपकी ज्यादा फील होगी। लेकिन अब सवाल आता है कि क्या कोई ऐसे दो सिंपल चीजें भी हैं जो कि इस प्रोसेस को और ज्यादा फास्ट कर दें जो कि लिवर इनफ्लेमेशन को कम करें और फैट के ब्रेकडाउन को एक्टिवेट करें?
तो जवाब है जी हां, दो सिंपल किचन इंग्रेडिएंट्स आपकी इस काम में बहुत ज्यादा मदद कर सकते हैं। और अब मैं आपको वही दो चीजें बताने वाला हूं। तो ये दो चीजें हैं हल्दी और काली मिर्च। दोस्तों, हल्दी में करक्यूमिन नाम का एक इंपॉर्टेंट कंपाउंड होता है। रिसर्च दिखाती है कि करक्यूमिन नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के पेशेंट्स में लिवर एंजाइम्स यानी एसजीओटी और एसजीपीटी को कम करता है। साथ ही यह लिवर इनफ्लेमेशन को भी कम करता है और फैट के एक्यूमुलेशन को भी कंट्रोल करता है। लेकिन एक प्रॉब्लम यह है कि यह करक्यूमिन जो है बॉडी में इजीली अब्सॉर्ब नहीं होता। और इसीलिए इसके साथ काली मिर्च यूज़ करना बेहद जरूरी है। क्यों? क्योंकि काली मिर्च में पेपरिन होता है जो कि कारकुमिन के अब्सॉर्प्शन को 15 से 20 गुना तक बढ़ा देता है। यानी हल्दी कभी भी आपको अकेली नहीं लेनी है बल्कि हमेशा काली मिर्च के साथ ही इसको यूज़ करना है। अब इसे यूज़ करना कैसे है यह समझ लीजिए। बस आधा चम्मच हल्दी का पाउडर लीजिए। हल्दी अच्छी क्वालिटी की होनी चाहिए या अगर आपका सीजन है तो आप कच्ची हल्दी को इस्तेमाल कीजिए या फिर लकाडोंग हल्दी लीजिए जो कि एक स्पेशलाइज्ड फॉर्म है हल्दी की। इसे एक कप गर्म पानी में डालिए। ऊपर से एक चुटकी काली मिर्च मिलाइए और रात को सोने से पहले रोजाना पीजिए। अगर आप चाहें तो इसमें तीन से चार बूंदे देसी घी की भी मिला सकते हैं या फिर एक्स्ट्रा वर्जन ऑलिव ऑयल की भी मिला सकते हैं क्योंकि कैरक्यूमिन जो है वो फैट सॉलुबल होता है। तो इसे डालने से अब्सॉर्प्शन और ज्यादा बेटर हो जाएगा। लेकिन याद रखिएगा अगर आप दिन भर मीठा खाते रहेंगे, मैदा खाते रहेंगे, चावल खाते रहेंगे तो सिर्फ हल्दी से कुछ भी नहीं होगा। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि लिवर फैट कम हो जाए, आपका बेली फैट घटने लगे, पेट कम हो जाए, तो वो चार टिप्स जो मैंने अभी थोड़ी देर पहले आपको बताए थे यानी दिन में तीन टाइम खाना खाना, रिफाइंड कार्ब्स को बंद करना, डिनर जल्दी करना और रोजाना आधा घंटे की वॉक करना। ये चार बातें आप खासतौर से याद रखिएगा। अगर आप सिंसियरली इनको फॉलो करेंगे तो दो हफ्ते में ही आपके पेट की टाइटनेस जो है वह कम हो जाएगी। ब्लोटिंग कम हो जाएगी। पेट की चर्बी घटने लगेगी और आपका फैटी लिवर में भी आपको जबरदस्त फायदा मिलेगा।